
मैं पूरे दिन तो संगोष्ठियों में नहीं रह पाया लेकिन जितनी देर रहा उस दौरान यही पाया कि यह संगठन अभी नव माध्यम और ब्लॉग से जुड़े सभी लोगों को एक मंच पर नहीं ला पाया है, लेकिन पहल अच्छी है और ऐसी संस्थाएँ अगर और लोगों को भी अपने साथ जोड़ें और उनकी समस्याओं और अधिकारों के संरक्षण की जिम्मेदारी भी लें तो मुख्यधारा की पत्रकारिता से अलग बहुत कुछ लोकतांत्रिक लेखन और बहुत कुछ प्रतिभाओं को जानने के अवसर मिलेंगे जैसे अभी मिलने लगे हैं।

यह भी सही है कि अभी देश में इतनी संपन्नता नहीं आई है कि आम आदमी अखबार की जगह नव माध्यमों का इस्तेमाल करे, लेकिन आने वाले दिनों में इनका दायरा और अधिक बढ़ेगा जिससे प्रशासन, शिक्षा और व्यापार से लेकर लोकतांत्रिक विमर्शों में अधिकाधिक लोगों की भागीदारी संभव होगी।
बातचीत तो अब होती ही रहेगी इसलिए आज इतना ही....